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शिवगलाई में लौह की खोज

तमिलनाडु के सिवागलाइ में प्राचीन लौह युग के साक्ष्य: भारतीय इतिहास पर एक नया प्रकाश **परिचय** तमिलनाडु में स्थित सिवागलाइ (Sivagalai) पुरातात्विक स्थल पर हुई हालिया खुदाई ने भारतीय इतिहास, विशेषकर दक्षिण भारत के लौह युग (Iron Age) के कालक्रम पर एक महत्वपूर्ण और रोमांचक बहस छेड़ दी है। इन उत्खननों से प्राप्त कलाकृतियाँ यह संकेत देती हैं कि भारत में लोहे के उपयोग की शुरुआत अनुमान से कहीं अधिक प्राचीन हो सकती है। **खुदाई में प्राप्त प्रमुख निष्कर्ष** सिवागलाइ के उत्खनन से पुरातत्वविदों को कई मूल्यवान वस्तुएँ मिली हैं, जो उस काल की उन्नत कारीगरी को दर्शाती हैं: * **दफन कलश (Burial Urns):** खुदाई में कुल **161 दफन कलश** बरामद हुए हैं, जो प्राचीन समाधि प्रथाओं की जानकारी देते हैं। * **लौह वस्तुएँ:** इस स्थल से **85 लौह वस्तुएँ** (Iron objects) प्राप्त हुई हैं, जिनमें संभवतः औजार और हथियार शामिल हैं। * **काल निर्धारण:** इन कलाकृतियों के साथ मिले कार्बन नमूनों (charcoal samples) के विश्लेषण से पता चला है कि ये **3345 ईसा पूर्व (BCE)** तक पुरानी हैं। **ऐतिहासिक महत्व** सिवागलाइ की ये खोजे...

थोड़ा हम झुकते हैं – By Pramod Kumar Pathak

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थोड़ा हम झुकते हैं। थोड़ा तुम झुक जाओ झुकते हो जैसे बादल । जैसे उड़ते हो आंचल  राह भी चले आह बोले । नज़र का खेल चाल बोले एहसास है पागल मन को । एक झलक लड़ जाएं नैन को कुछ ओ झुके कुछ हम झुके । कुछ हम रूके कुछ ओ रूके एहसास दिलों में समां गया । तस्वीर बन यादों में समां गया  बादल झुका हम भी झुके । प्यार के अहसास दोनो रूके कुछ हम झुके कुछ ओ झुकें ।     लेखक : श्री प्रमोद कुमार पाठक