थोड़ा हम झुकते हैं – By Pramod Kumar Pathak



थोड़ा हम झुकते हैं।
थोड़ा तुम झुक जाओ
झुकते हो जैसे बादल ।
जैसे उड़ते हो आंचल 
राह भी चले आह बोले ।
नज़र का खेल चाल बोले
एहसास है पागल मन को ।
एक झलक लड़ जाएं नैन को
कुछ ओ झुके कुछ हम झुके ।
कुछ हम रूके कुछ ओ रूके
एहसास दिलों में समां गया ।
तस्वीर बन यादों में समां गया 
बादल झुका हम भी झुके ।
प्यार के अहसास दोनो रूके
कुछ हम झुके कुछ ओ झुकें ।


    लेखक : श्री प्रमोद कुमार पाठक 
     
                

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