सनातन - एक संगठित धर्म

संगठित सनातन  

वर्तमान समय अर्थात 21वीं सदी या फिर हम कहें कि आधुनिक कलयुग में सनातन धर्म के बारे में जो सबसे बड़ी समस्या बताई जाती है वह है सनातन धर्मियों का एकत्र या फिर संगठित ना होना । हमें लगातार दिखाया जाता है कि सनातन धर्मी अलग-अलग प्रकार के जातियों तथा पंथ्यों में बटे हुए । पर अगर ध्यान दे कर और अलग-अलग उदाहरण से देखा जाए तो शायद सनातन धर्म आज भी विश्व का सबसे संगठित धर्म है ।

वर्तमान समय में कुल 57 इस्लामिक बहुसंख्यक देश हैं , जिसमें अधिकांश का संविधान भी इस्लामिक कानूनों पर आधारित है । 
दुनिया में कुल मिलाकर 106 देश ऐसे हैं जिनमें बहुसंख्यक आबादी ईसाई धर्म को मानती है और उनमें भी 13 देश ऐसे हैं जो इसी मूल्यों पर आधारित है ।  

अगर आप ध्यान देंगे तो ऐसे कितने देश हैं जो हिंदू धर्म पर आधारित है या फिर जहां पर बहुसंख्यक आबादी हिंदू है , तो आपको देखने को मिलेगा की दुनिया में केवल दो देश ऐसे हैं जहां पर बहुसंखयक आबादी हिंदू है , और उसमें से भी संविधानिक रूप से देश हिंदू मूल्य पर आधारित नहीं है । एक नेपाल देश था जो हिंदू धर्म को आधिकारिक धर्म मानता था परंतु 2015 वह भी एक सेक्युलर देश के रूप में पहचाने जाने लगा है । 
अगर सनातन धर्म आज जातियों में बटा होता तो शायद हमारे पास कम से कम 21 देश होते जो सनातन धर्म बहुसंख्यक होते ।

भारत में देखा जाए तो कुल 22 आधिकारिक भाषाएं है । पर यहां पर एक खास बात देखने को मिलती है कि भारत में अलग-अलग प्रकार के भाषाएं , बोली तथा जातियां हैं , परंतु इसके बाद भी वह एक राष्ट्र के अंदर एक दूसरे के साथ मिलकर रहने को तैयार है । यह भारत में केवल इसलिए संभव है क्योंकि यह एक हिंदू बहुसंख्यक राष्ट्र है । 
चलिए हम अरब की दुनिया का उदाहरण लेते हैं । सऊदी अरब , संयुक्त अरब अमीरात , यमन , ओमान , बहरीन , कतर , कुवैत यह सभी एक मुस्लिम बहुल राष्ट्र है यहां तक कि उनकी बोली भी एक ही है , जो की अरबी है । परंतु संगठित होने की कमी को देखने के कारण ही आपको यह अलग-अलग राष्ट्रों में बंटे हुए हैं । हर एक जाति अपना खुद का एक अलग देश बने हुए हैं । वर्तमान समय में अगर आप ध्यान दें तो सीरिया जो की एक इस्लामी बहुल देश था उसका भी गृहयुद्ध और भविष्य के संभावित बंटवारे का कारण सिर्फ और सिर्फ जातियों में विभाजित अरब का इस्लामी समाज है । 
चलिए हम अगला उदाहरण अफ्रीका का ले लेते हैं तो आपको देखने को मिलेगा कि मिश्र , लीबिया , ट्यूनीशिया , मोरक्को आदि यह सभी के सभी देश इस्लामी बहुल राष्ट्र है पर यहां पर भी यही समस्या है की जातियों में बटा हुआ इस्लामी समाज एक साथ मिलकर रहने को तैयार नहीं है और इसलिए हर एक जाति में और हर एक भाषा भाषी ने अपना एक अलग देश बनाया हुआ है ।
सोचने की बात है कि जिस हिंदू समाज को असंगठित रूप में दिखाया जाता है , आपको देखने को मिलेगा कि यहां पर हम कभी भी भाषाई आधार पर अलग देश नहीं बनाते हैं । आपने कभी नहीं सुना होगा कि ब्राह्मण, राजपूत ,मराठी , तेलुगू , गोंड  , संथाली, पंजाबी , बिहारी , गुजराती , बंगाली  , बुंदेलखंडी इन्होंने कभी भी अपने अपने लिए अलग देश बनाने की मांग नहीं की है । कुछ मुद्दो को लेकर जो विवाद होते भी हैं वह यह समाज आपस में ही सुलझा लेता है और विश्व में कहीं पर भी आपको ऐसा उदाहरण देखने को नहीं मिलता । 

चलिए इसी समाज का उदाहरण लेते हैं । मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका , कनाडा यह सभी मूल रूप से देखा जाए तो ईसाई बहुसंख्यक देश है परंतु इनमें भी किसी प्रकार की एकता देखने को नहीं मिलती वरना यह सभी लोग एक ही राष्ट्र के रूप में रहने को तैयार होते सनातन धर्म की तरह  । 
ईसाई देश जो कि लैटिन अमेरिका में मौजूद हैं जैसे कि ग्वाटेमाला, होंडुरास , निकारागुआ यह सभी एक ही भाषा बोलने वाले तथा एक ही धर्म को मानने वाले लोग होते हुए भी बहुत छोटे-छोटे राष्ट्रों में बंटे हुए हैं क्योंकि इनमें एक साथ रहने की भावना कभी विकसित हो ही नहीं पाई । 
यूरोप के देश नॉर्वे ,  स्वीडन , डेनमार्क, फिनलैंड यह तो भाषाई आधार पर भी काफी कुछ एक जैसे हैं परंतु इन्होंने अपनी अलग-अलग जातियों के लिए एक अलग-अलग देश बना कर रखे हुए हैं । और बाकी दुनिया के उदाहरण से अलग यूरोप में तो बहुत ही छोटे-छोटे देश मौजूद हैं जो कि केवल जाति आधार पर बैठे हुए हैं । 
आप स्पेन के एक राज्य कैटालोनिया का उदाहरण ले सकते हैं जहां लोग स्पेनिश भाषा बोलते हैं  बाकि स्पेन की तरह और धर्म के आधार पर भी वहां के लोग ईसाई हैं । परंतु अलग देश की मांग रखते हैं सिर्फ और सिर्फ अपने आर्थिक स्थिति के आधार पर । कैटोलोनिया की तुलना अगर भारत के महाराष्ट्र और गुजरात से की जाए जो देश के सबसे धनी राज्य है , तो ऐसा लगेगा जैसे मराठी और गुजराती लोग कहेंगे कि हमें बिहार और बंगाल के साथ नहीं रहना है इसलिए हमें अलग देश चाहिए ।  परंतु सनातन धर्म की संगठित एकता के कारण देखिए कि यह सभी एक देश के रूप में साथ हैं । 

पास का उदाहरण देखें तो हमारे पड़ोसी पाकिस्तान के रूप में देख सकते हैं  । पाकिस्तान का बंटवारा केवल और केवल भाषाई आधार पर हो गया जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों ही मुस्लिम बहुत संख्या क्षेत्र थे । 

अगर आप चीन का उदाहरण ले तो बौद्ध बहुसंख्यक यह देश भी एक साथ रहने को तैयार नहीं थे । चीन ने गृह युद्ध लंबे समय तक झेला है। इसलिए चीन की सरकार ने धर्म को ही अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया ताकि वह सभी लोग एक साथ मिलकर रहें और मंगोल ,मंचूरियन , तिब्बत , चीन सब एक देश बन पाए जब उन्होंने धर्म को प्रतिबंधित किया और तानाशाही कम्युनिस्ट शासन स्थपित कर दिया । 

तो अगली बार कभी भी अगर आपके मन में शंका हो कि सनातन धर्म एक संगठित धर्म नहीं है तो अपने राष्ट्र भारत के बारे में एक बार सोचिएगा , तो आपको स्वयं समझ में आ जाएगा कि विश्व का सबसे संगठित समुदाय कौन है ।

       // तेजस्वी //

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